‘युति’ से संभाग में ‘सेना’को मिली ‘संजीवनी’

प्रतिनिधि/दि.१४ अमरावती- पांच जिलोंवाले अमरावती संभाग में कुल जमा साढेचार लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रोंका समावेश होता है. इसके तहत अमरावती, अकोला, यवतमालवाशिम तथा बुलडाणा इन चार लोकसभा सीटों का समावेश है. वहींअमरावती जिले के मोर्शी-वरूड व धामणगांव तहसीलों का समावेश वर्धा संसदीय क्षेत्र में होता है. इसे संभाग के लिहाज से आधी सीट पकडा जा सकता है.

इन पांच संसदीय सीटों में से तीन सीटें विगत चुनाव में शिवसेना के हिस्से में गयी थी और तीनों सीटों पर सेना प्रत्याशी विजयी भी रहे थे. वहीं अकोला व वर्धा निर्वाचन क्षेत्र भाजपा के कोटे में थे. यहां से भाजपा प्रत्याशी विजयी रहे थे. ऐसे में यदि यहां केवल अमरावती संभाग की चार सीटों का भी विचार किया जाये, तो चार में से तीन सीटें शिवसेना के हिस्से में है. अत: यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि, युती होने के चलते पांच जिलोंवाले अमरावती संभाग में शिवसेना को मानों संजीवनी मिल गयी है और जहां शिवसेना को केवल अकोला संसदीय क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी की सहायता करनी होगी, वहीं उसे संभाग में तीन सीटों पर भाजपा का भरपूर सहयोग मिलेगा.

इसके साथ ही भाजपा के कोटे से राज्य मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री रहनेवाले प्रवीण पोटे पाटिल, डॉ. रणजीत पाटिल व मदन येरावार सहित राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त विधायक डॉ. सुनिल देशमुख का सेना प्रत्याशियों को पूरा सपोर्ट भी मिलेगा. जिससे युति होने के चलते अमरावती संभाग में शिवसेना बेहद फायदे एवं मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहीं है. उल्लेखनीय है कि, विगत लंबे समय से शिवसेना व भाजपा में वरिष्ठ स्तर पर जबर्दस्त तनातनी दिखाई दे रहीं थी. जिसके चलते एक समय युती टूटने और दोनों दलों द्वारा अपनेअपने दम पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लडने के आसार दिखायी दे रहे थे. जिससे विगत चुनाव में विजयी रहे व आगामी चुनाव लडने के इच्छुक सेना सहित भाजपा सांसदों में चिंता व संभ्रम की लहर देखी जा रहीं थी. य्योंकि हर कोई युती होने की स्थिति में ही अपनी जीत को सुनिश्चित मानकर चल रहे थे. ऐसे में दोनों दलों के नेताओं द्वारा युती के संदर्भ में निर्णय लिये जाते ही आगामी चुनाव लडने के इच्छुकों ने राहत की सांस ली. इसमें भी यदि अमरावती संभाग का विचार किया जाये तो युती के चलते अमरावती संभाग में शिवसेना फायदे में दिखाई दे रही है, य्योंकि यहां उसे डेढ सीट पर समर्थन देकर तीन सीटों पर समर्थन मिलेगा. साथ ही भाजपा कोटे से मंत्री बनाये गये भाजपा नेताओं की ताकद का फायदा भी पहुचेंगा. अत: कहा जा सकता है कि, युती के चलते शिवसेना को अमरावती संभाग में संजीवनी प्राप्त हुई है.

युती सम्मेलन को लेकर हुई नियोजन बैठक
आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी व शिवसेना के बीच हुई युती के चलते दोनों दलों के नेताओं के बीच आपसी तालमेल व समन्वय स्थापित करने हेतु राज्य के सभी ९ संभागों में संभागीय स्तर पर भाजपा-सेना पदाधिकारियों का युती सम्मेलन आयोजीत किया जा रहा है. जिसके तहत सबसे पहला सम्मेलन शुक्रवार १५ मार्च को अमरावती संभाग में आयोजित है. इस सम्मेलन के आयोजन को सफल बनाने हेतु गुरूवार १४ मार्च की दोपहर जिला पालकमंत्री प्रवीण पोटे के कैम्प रोड स्थित जनसंपर्क कार्यालय में जिले के भाजपा व सेना पदाधिकारियों की नियोजन बैठक बुलायी गयी. जिसमें शुक्रवार को आयोजित सम्मेलन के नियोजन को लेकर विचारविमर्श किया गया. इस नियोजन बैठक में जिले के सांसद व आगामी चुनाव में शिवसेना के संभावित प्रत्याशि आनंदराव अडसूल सहित स्थानीय विधायक डॉ. सुनील देशमुख व मोर्शी-वरूड़ निर्वाचन क्षेत्र के विधायक डॉ. अनिल बोंडे के साथ ही शहर सहित जिले के भाजपा व शिवसेना पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे.

कल सीएम फडणवीस व शिवसेना पार्टी प्रमुख उध्दव ठाकरे शहर में
बता दें कि, स्थानीय मोर्शी रोड स्थित संत ज्ञानेश्वर सांस्कृतिक भवन में शुक्रवार १५ मार्च को आयोजीत युति पदाधिकारियों के पहले संभागीय सम्मेलन में राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व शिवसेना के पार्टी प्रमुख उध्दव ठाकरे खुद उपस्थित रहनेवाले है. इसके अलावा इस सम्मेलन में राज्य के वित्त व वनमंत्री सुधीर मुनगंटीवार, उद्योग मंत्री सुभाष देसाई एवं राज्यमंत्री सर्वश्री प्रवीण पोटे पाटिल, डॉ. रणजीत पाटिल, संजय राठोड, मदन येरावार तथा दीपक सावंत सहित अमरावती संभाग व वर्धा जिले के वर्तमान सांसद सर्वश्री आनंदराव अडसूल, संजय धोत्रे, प्रतापराव जाधव, भावना गवली एवं रामदास तडस मुख्य रूप से उपस्थित रहेंगे. इसके साथ ही १२०० आसन क्षमतावाले सांस्कृतिक भवन में संभाग के पांचों जिलों से शिवसेना व भाजपा के जिला प्रमुख व शहर प्रमुख सहित सभी जिलों के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे. इस सम्मेलन में आगामी चुनाव के लिए किये जानेवाले कामों का नियोजन करने के साथ ही जनता के बीच य्या संदेश लेकर जाना है, इस पर चिंतन व मनन किया जायेगा. इसके अलावा भाजपा व सेना पदाधिकारियों के बीच बेहतरीन आपसी तालमेल स्थापित करने हेतु समन्वय प्रमुख की नियुक्ति भी की जायेगी.

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