हर एक को पार्टी में प्रवेशा ना दे भाजपा, विरोधक जरूरी है- उध्दव ठाकरे


इस अवसर पर अपने संबोधन में शिवसेना के पार्टी प्रमुख उध्दव ठाकरे ने कहा कि, यदि इस लोकसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना की युती नहीं हुई होती, तो हमें ५० वर्ष पुर्व जिस संघर्ष के साथ अपने राजनीतिक सफर का प्रारंभ करना पड़ा था, वहीं स्थिति एक बार फिर उत्पन्न हुई होती और हमें उसी शून्य के साथ फिर शुरूआत करनी पडती थी. इस समय उन्होंने यह भी कहा कि, आज राजनीतिक हालात कुछ इस कदर तेजी से बदल रहे है कि, किसकी प्रशंसा करें, और किसकी आलोचना करें, यह समझ में नहीं आता, य्योंकि आज हम जिसकी आलोचना करते है, वह दूसरे दिन युति के साथ खडा दिखायी दिया तो बड़ी पंचायत होनेवाली स्थिति पैदा हो सकती है. इस समय शिवसेना के पार्टी प्रमुख उध्दव ठाकरे की ओर देखते हुए बडे व्यंगात्मक अदाज में कहा कि, फडणवीस साहेब एक मेहरबानी करना, कम से कम पवार साहेब को भाजपा में मत ले लेना.

सेना के पार्टी प्रमुख उध्दव ठाकरे द्वारा यह कहते ही पूरा सदन हंसी के ठहाकों से गूंज उठा. इस समय उन्होंने अब तक घटित राजनीतिक घटनाक्रमों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, विगत पांच वर्षों के दौरान कई बार इच्छा नहीं रहने के बावजूद हमने म्यान से तलवार निकाली और आगे भी जो अच्छी बात रहेंगी, हम उसे अच्छा कहेंगे. वहीं जो गलत बात रहेगी उसे खुले तौर पर सबके सामने रखेंगे. अपने इस वक्तव्य के साथ ही उध्दव ठाकरे ने कहा कि, विगत चार वर्षों के दौरान भाजपा व सेना के बीच चाहे जीतने विवाद व संघर्ष हुए हो, किंतु हम कभी भी विकास के आडें नहीं आये. साथ ही उन्होंने कहा कि, विगत पांच वर्षों के दौरान शिवसेना ने जो संघर्ष किया, वह व्यक्तिगत वजहों को लेकर नहीं था.

बल्कि हमारा संघर्ष राज्य की गरीब जनता के लिए था, य्योंकि केंद्र व राज्य सरकार द्वारा यद्यपी बेहतरीन योजनाएं शुरू की गई थी, किंतु कई बिचौलिये पात्र लाभार्थियों तक इन योजनाओं को पहुंचने नहीं दे रहे थे. उन्होंने यह भी साफ किया कि, राज्य की जनता के लिए भाजपा एवं सेना की युती उम्मीद की अंतिम किरण है और सर्वसामान्य जनता के लिए ही हिंदु हृदयसम्राट शिवसेना प्रमुख बालासाहब ठाकरे व तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहार वाजपेयी ने एक साथ आते हुए भाजपा-सेना युति का गठन किया था. यदि हम इस बात को भुल गये तो हमसे बड़ा दुर्भाग्यशाली कोई नहीं होगा. उन्होंने यह भी कहा कि, कांग्रेस के जमाने में खुद को हिंदु कहने में भी डर लगता था और यदि हमारे दोनों नेताओं के साथ हमारे लाखों कार्यकर्ताओं ने अपना खुन-पसीना नहीं बहाया होता तो वहीं हालात आज भी कायम रहे होते, लेकिन आज हालात बदल गये है और देश का हिंदु पुरे सम्मान के साथ सिर उंचा करते हुए जीवन जी रहा है.

इस समय बिना किसी का नाम लिये उन्होंने कहा कि, हमारे पास आस्तीन के सांपों की औलाद नहीं है तथा दोनों ओर शेर ही शेर है. अत: मौका परस्त लोगों ने अब पुंगी बजाते हुए बैठना चाहिए. उध्दव ठाकरे के इस वक्तव्य को विधायक राणा पर निशाना पर माना गया. उध्दव ठाकरे ने अमरावती जिले को संतों व समाजसुधारकों की भुमि बताते हुए कहा कि, इस पवित्र भुमि से आज भगवा युति अपनी एक नई शुरूआत कर रहीं है. यह अपने आप में बेहद सौभाग्य की बात है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *