स्ट्रांग रूम में रखे ईव्हीएम के सीसीटीवी फुटेज नहीं मिलेंगेे प्रत्याशियों को

प्रतिनिधि/दि.८ नागपुर- लोकसभा चुनाव का मतदान ७ चरणों में लिया जा रहा है. पश्चात २३ मई को सार्वत्रिक मतगणना होगी, तब तक के लिए सभी प्रत्याशियों का भाग्य स्ट्रांग रूम में रखे गये ईव्हीएम में कैद रहेगा. स्ट्रांग रूम पर तीसरी आँख का कडा पहरा भी लगाया गया है. लेकिन प्रत्याशियों को ईव्हीएम रखे हुए स्ट्रांग रूम के सीसीटीवी फुटेज नहीं मिल सकेंगे. कल रविवार को हायकोर्ट ने याचिकाकर्ता नाना पटोले की याचिका पर फैसला देते कहा कि चुनाव सुरक्षित, पारदर्शी व जिम्मेदार पध्दति से होने चाहिए. नाना पटोले ने स्ट्रांग रूम में रखे गये ईव्हीएम मशीन के फुटेज उम्मीदवारों को मिले, यह मांग की थी. लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि, वर्तमान स्थिति में इसमें हस्तक्षेप नहीं करते आयेगा. संबंधित फैसला देते कोर्ट ने नाना पटोले को राहत देने से इनकार किया, लेकिन यही विषय उचित समय पर रखने का पर्याय भी कोर्ट ने खुला रखा है. नागपुर शहर कांग्रेस समिति व नाना पटोले ने हायकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर नागपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के संदर्भ में विविध प्रश्न उपस्थित किए थे. अनेकों मांगे इस याचिका के माध्यम से काँग्रेस समिति व नाना पटोले ने की थी.

इस याचिका पर न्यायमूर्ति रवि देशपांडे व श्रीराम मोडक की अदालत ने फैसला सुनाते बताया कि चुनाव मेें बाधा निर्माण हो, ऐसा कोई भी  आदेश कोर्ट नहीं देगा. चुनाव सुरक्षित, पारदर्शी व जिम्मेदार पध्दति से होना चाहिए. यही हमारा उद्देश्य है, ऐसा भी कोर्ट ने शुरूआत में ही स्पष्ट करते याचिकाकर्ता का हर एक मुद्दा सुनकर उस पर चुनाव निर्णय अधिकारियों का जवाब लिया व आवश्यक निर्देश दिए. नागपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में ३ हजार २५ मतदान केन्द्र है. जहां पर ईव्हीएम में कुछ छेड़छाड़ नहीं हुई यह जांचने के लिए हर एक मतदान केन्द्र पर मतदान शुरू होने से पहले उम्मीदवार तथा उनके प्रतिनिधियों को ५० टेस्ट करते आती है. यह संख्या बढ़ाने की मांग पटोले ने की थी. लेकिन न्यायालय ने इस विवाद में जाना टालते हुए संबंधित मुद़्दा उचित समय पर योग्य मामले में रखने का मार्ग खुला रखा.

गौरतलब है कि शनिवार व रविवार को हायकोर्ट को छुट्टी रहती है. बावजूद इसके हायकोर्ट ने छुट्टी के दिन भी संबंधित मामले पर सुनवाई की. पहलीबार छुट्टी के दिन भी कोर्ट की कार्यवाही देर तक चलने से नागरिकों में भी कोर्ट प्रति सम्मान बढ़ गया है. कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से एड. मीनाक्षी अरोरा, एड. आर एस अकबानी, सरकारी पक्ष के वकील एड. एम.एम. देशपांडे, चुनाव आयोग के वकील एड. जेमिनी कासट, एड. नीरज चौबे ने पैरवी की. सुनवाई दौरान चुनाव आयोग की ओर से चुनाव निर्णय अधिकारी अश्विन मुदगल ने स्वयं पक्ष रखा तथा कोर्ट को विश्वास दिलाया कि भारत चुनाव आयोग द्वारा ईव्हीएम, विविपैट, कंटोल यूनिट, बॅलेट यूनिट संदर्भ में मार्गदर्शक तत्व व निर्देशों का कडाई से पालन किया जा रहा है.

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