विदर्भ में तीन महिने में पांच शेर की मृत्यु

प्रतिनिधि/दि.१० नागपुर- शेरों को बचाने के लिए बडे पैमाने पर प्रयत्न किये जा रहे है. इसके बावजूद बाघों की लगातार मृत्यु चिंता का विषय है. विशेषकर विदर्भ में पिछले तीन महिनों में पांच बाघ मारे गये. अमरावती व नागपुर में दो-दो तथा यवतमाल में एक बाघों की मृत्यु हुई है. हालांकि जानकारी मिल रही है कि सभी की मृत्यु नैसर्गिक रूप से हुई  लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में यह संख्या अधिक है. इसी के चलते वनों का संवर्धन व संरक्षण का मुद्दा फिर चर्चा में है. महाराष्ट्र को देश में शेरों की राजधानी कहा जाता है और इस राजधानी में बाघों की मृत्यु चिंता का विषय है. पेंच व्याघ्र प्रकल्प में देवलापार वनपरिक्षेत्र में पहली घटना हुई. दूसरे ही दिन चिखलदरा के मोथा में मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प में एक बाघ मारा गया. अकोट तालुका में शहापुर में तीसरा और नागपुर जिले के देवलापार वनपरिक्षेत्र में चौथा तथा यवतमाल जिले के पांढरकवडा तालुका में टिपेश्वर के जंगल में पांचवा बाघ मारा गया. यह भी गौरतलब है कि पांच में से तीन मादा शेर है. अच्छी बात यह है कि चंद्रपुर जिले में सबसे अधिक बाघ है लेकिन वहां एक की भी मृत्यु नहीं हुई. संबंधितों का मानना है कि सभी बाघों की मृत्यु प्राकृतिक रूप में हुई लेकिन गर्मी के मौसम में पानी की तलाश में सब तरफ भटकना और ऐसे समय नदी, तालाब में जहर मिलाकर शेरों को मारने से इन्कार नहीं किया जा सकता, य्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बाघों के अवशेषों की भारी कीमत है.

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