अब जाति वैधता जांच होगी आसान

प्रतिनिधि/दि.११अमरावती-प्रति वर्ष जाति वैधता प्रमाणपत्र समय पर नहीं मिलने की वजह से व्यवसाईक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने के इच्छूक विद्यार्थियों सहित सरकारी नौकरियों में आवेदन करनेवाले अभ्यर्थियों को होनेवाली तकलीफों एवं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने इस सामाजिक समस्या को हल करने हेतु बड़ी गंभीरता के साथ प्रयासकरने शुरू किये है. जिसके अंतर्गत जाति वैधता जांच समितियों के कामकाज व संरचना में सुधार करने का प्रयास करते हुए संबंधितों को जातिवैधता प्रमाणपत्र तय समयावधि के भीतर ही मिले. इस हेतु विशेष अभियान चलाया जा रहा है.

इसके तहत अमरावती विभागीय जाति वैधता प्रमाणपत्र समिती सहित राज्य की सभी आठ विभागीय जाति वैधता प्रमाणपत्र समिती में रिक्त पदों को आगामी मई २०१८ तक भरा जायेगा. साथ ही दक्षता विभाग के पदों पर भी गृह विभाग के जरिये मई २०१९ तक नियुक्तियां की जायेगी, ऐसा पता
चला है. बता दें कि, महाराष्ट्रअनुसूचित जाति-जमाति, विमुक्त जाति, भटय्या जमाति, अन्य
पिछडावर्गीय, विशेष पिछडावर्गीय जाति प्रमाणपत्र जारी करने व नियमन
करने अधिनियम २००० इस कानून के तहत राज्य के सभी जाति, जमाति
के व्यक्तियों को दिये गये जाति प्रमाणपत्रों की जाति वैधता जांच समिती
द्वारा जांच कर उन्हेें जाति वैधता प्रमाणपत्र दिया जाता है.

इस हेतु राज्य में
केवल आठ समितियां बनायी गयी है तथा इन समितियों के पास दो से लेकर
आठ जिलों तक की जिम्मेदारी है. साथ ही कई समितियों में सदस्यों व
संबंधितों के पद रिक्त पडे है. ऐसे में इन अधूरी समितियों, सदस्यों की
अधूरी संख्या तथा समिति के कामकाज में होनेवाली त्रृटियों को देखते हुए
जाति प्रमाणपत्र से संबंधित मसला बेहद गंभीर होता जा रहा है और इस
वजह से कई विद्यार्थियों एवं सरकारी नौकरियों में आवेदन करनेवाले युवकयुवतियों
का नुकसान भी हो रहा है. इस संदर्भ में औरंगाबाद स्थित शिवेश्वर
आदिवासीबहुउद्देशीय सेवाभावी संस्था ने एड. जगदीश रेड्डी के माध्यम से
मुंबई हाईकोर्ट के औरंगाबाद खंडपीठ में एक जनहित याचिका दायर की
थी. जिसे गंभीरता से लेते हुए मुख्य न्यायमूर्ति नरेश पाटिल के नेतृत्ववाली
खंडपीठ ने सरकार को तत्काल उपाय ढूंढने के निर्देश दिये थे. पश्चात राज्य
के महाधिवक्ता आशूतोष कुंभकोणी ने सरकार की ओर से प्रस्तावित उपायोग
की जानकारी हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान खंडपीठ को दी. जिसके
अनुसार व्यवसायीक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के इच्छूक विद्यार्थियों से छह माह
पहले ही अपने जाति प्रमाणपत्र वैधता जांच हेतु आवेदन करे. इस आशय
का आवाहन अखबार एवं प्रसार माध्यमों में विज्ञापन देकर तथा जिप के
शिक्षा अधिकारियों के मार्फत करने का नियोजन किया गया है. साथ ही इन
समितियों का कामकाज प्रभावी रूप से चलाते हुए सभी आवेदनों का
निपटारा तय समय में होने हेतु समितियों के सदस्य तथा समिती दक्षता पथक
के
अधिकारियों हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने का नियोजन भी सरकार द्वारा
किया
गया है.इस संदर्भ में मिली जानकारी के मुताबिक अकेले अमरावती
संभाग
में ही जाति वैधता जांच समिती के सामने १ हजार २९७ मामलों की
सुनवाई
प्रलंबित है. वहीं समूचे राज्य में कुल २६ हजार ५६० जाति वैधता
प्रमाणपत्र
मामलों की सुनवाई अलग-अलग वजहों के चलते प्रलंबित पडी
हुई
है. बता दें कि, राज्य में अमरावती सहीत नागपुर, गढचिरोली, औरंगाबाद,
नंदूरबार,
नाशिक, पुणे व ठाणे में संभागीय स्तर पर जाति वैधता प्रमाणपत्र
जांच
समिति का गठन किया गया है.

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