घटती आबादी पर जैनों का ‘हम २, हमारे ३’


हिं.स./दि.५ मुंबई-भारत की कुल आबादी में जैन समुदाय की जनसंख्या में मामूली गिरावट आई है। घटती आबादी से चिंतित जैन समुदाय की दिगंबर शाखा ने दंपतियों से कहा है कि वह ज्यादा बच्चे पैदा करें। इस अपील के साथ ही ऐसे दंपतियों को आर्थिक मदद भी उपलब्ध कराने को कहा गया है जो दो से ज्यादा बच्चे पैदा करेंगे। पिछले हफ्ते दिगंबर जैन समाज की सर्वोच्च पीठ दिगंबर जैन महासमिति की इंदौर में बैठक हुई। इस बैठक में नारा दिया गया, ‘हम दो हमारे तीन’ इस अपील के साथ युवा जैन परिवारों से स्पष्ट कहा गया कि वह ज्यादा बच्चे पैदा करें। समिति ने यह भी घोषणा की कि उन जोड़ों को वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी जो दो से अधिक बच्चे पैदा करेंगे। इसके साथ ही तलाक के मामलों में कमी लाने के लिए दंपतियों की काउंसलिंग कराने की बात भी कही गई।
उठाएंगे तीसरे बच्चे की शिक्षा का खर्च-

देश के 16 राज्यों में सक्रिय इस समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक बडज़ात्या ने यह भी घोषणा की है कि जो लोग तीन बच्चे पैदा करेंगे उनके तीसरे बच्चे की शिक्षा का खर्च समिति उठाएगी।

संपन्न लोगों से जुटाया जाएगा धन-

अशोक बडज़ात्या ने कहा, ‘कई कारण हैं जिसकी वजह से युवा जोड़े ज्यादा बच्चे नहीं चाहते हैं। इसमें से एक कारण है धन। दिगंबर जैन महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, ‘अगर हम एक समुदाय के रूप में उनकी मदद करते हैं तो हम उन्हें और बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि समुदाय के सम्पन्न लोग जल्द ही एक साथ आएंगे और इस उद्देश्य के लिए धन एकत्र करेंगे और इस योजना को लागू करेंगे।

जैन समुदाय की जनसंख्या में आई गिरावट-

2001 की जनसंख्या के आंकड़े देखें तो 102 करोड़ भारतीय लोगों में जैन समुदाय की आबादी 42 लाख थी। दस साल बाद, 2011 की जनगणना से पता चला कि यह बढक़र 44 लाख हो गई लेकिन तब भारत की कुल जनसंख्या भी बढक़र 120 करोड़ हो गई। अगर सिर्फ जैन समुदाय की आबादी को संख्या के आधार पर देखें तो समुदाय की जनसंख्या 2001 की तुलना में 2011 में बढ़ी। हालांकि कुल जनसंख्या के मुकाबले 2001 में जहां उनकी आबादी में .03 फीसदी की गिरावट आई थी, वहीं 2011 में यह गिरावट बढक़र .40 फीसदी हो गई। हाल ही में आए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़े को देखें तो जैनों में प्रजनन दर 1.2 है, जबकि हिंदुओं के लिए यह 2.13 और मुसलमानों में 2.6 है।

अभी जैनों के दिगंबर समाज के लिए नारा-

अभी जैन समुदाय की दिगंबर शाखा के लिए हम दो हमारे तीन का नारा दिया गया है। माना जा रहा है कि बाद में इसे पूरे समुदाय के लिए अमल में लाया जाएगा। जैन धर्म की दो शाखाएं हैं- एक दिगंबर और दूसरी श्वेतांबर। जैन समुदाय के जैनेश झांझरी ने कहा कि जैन धर्म एक बहुत पुराना धर्म है और यदि समुदाय की आबादी प्रभावित होती है तो यह हमारे लिए नुकसानदायक होगा।

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